ग्रह-नक्षत्रों का व्यापार

यहां उस ज्योतिष विद्या का कोई विरोध नहीं जिसका उल्लेख वेदों में मिलता है और जो एक खगोल विज्ञान है। जिसके दम पर मौसम का ज्ञान हासिल किया जाता है। हम जानते हैं कि ज्योतिष एक विज्ञान है, लेकिन वर्तमान में इसका जो प्रचलित रूप है इससे लोगों में भ्रम और वहम ही ज्यादा फैल रहा है। इस विद्या के माध्यम से लोग ठगे जा रहे हैं। आजकल तो महान ज्योतिषाचार्य लोगों से 10 हजार रुपए तक वसूलते हैं और अंतत: होता-जाता कुछ नहीं। ज्योतिष को धर्म से अलग करके देखने की जरूरत है। आजकल यह एक सामाजिक बुराई बन गई है।



 


एक शहर में कम से कम हजार से ज्यादा एस्ट्रोलॉजर या टेरो कार्ड विशेषज्ञ होंगे, जो संपूर्ण शहर को आत्मविश्‍वास की कमी से ग्रसित करने में सक्षम हैं। तथाकथित ज्योतिषियों के कारण यह देश वहमपरस्तों और अंधविश्वासियों का देश बन गया है। ऐसे देश के लोगों से एकसाथ किसी विषय पर उठ खड़े होने की अपेक्षा नहीं की जा सकती है। ज्योतिष या ग्रह-नक्षत्रों को मानने वाला व्यक्ति ईश्वर या खुद पर कभी विश्‍वास या आस्था नहीं रखता। ऐसे देश में कभी क्रांतियां नहीं होतीं। ज्योतिष की विद्या धीरे-धीरे असल धर्म को खा जाती है।